आपका Whatsapp Status ऐसे आपको पहुँचा सकता है जेल : कोर्ट ने दी नसीहत

आज के इस Session में एक और नई जजमेंट के साथ चर्चा करेंगे। आपको बता दे कि आपका व्हाट्सअप स्टेटस भी आपको जेल पहुंचा सकता है। कोर्ट ने एक व्हाट्सअप यूज़र्स को एक नसीहत दे दी है। जिसमे उसने सोसल मीडिया पर अपनी जिम्मेदारी निभाने की सलाह दी है। उसने एक धार्मिक समूह के प्रति नफरत को बढ़ावा देने वाली सामग्री पोस्ट करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ मामला रद्द करने से कोर्ट ने मना कर दिया है। इसके सम्बंध में न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वाल्मीकि SA मेनेजेस की पीठ ने कहा कि

 
व्हाट्सएप स्टेटस का मतलब और इसका मकसद केवल अपने ही कांटेक्ट तक ही बात पहुंचाना होता है। यह केवल परिचित एवं अपने परिवार वालो के साथ बात साझा एवं अपनी बात पहुंचाने का केवल एक संचार है। आपको बता दे कि यहां पर कोर्ट ने कहा कि आजकल लोग समय समय पर व्हाट्सएप स्टेटस चेक करते रहते है इसलिए दुसरो की कोई भी बात बताने से पहले जिम्मेदारी से एवं दिमाक से काम लेना जरूरी है।
 
यह मामला वर्ष 2023 की एक घटना से जुड़ा हुआ है जब उन्होंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए एक धार्मिक समूह के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। यहां तक कि उस स्टेटस में एक प्रश्न भी था जो दर्शकों को चौकाने वाले परिणाम के लिए गूगल पर इसको प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया था। जब लोगो ने इस प्रश्न को गूगल पर खोजा तो वो प्रश्न धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाली आपत्तिजनक सामग्री निकली। जो धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध थी।
 
यहां पर हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमे IPC की धारा 295A अत्याचार निवारण अधिनियम एवं SC , ST की धारा 3(1 V ) और सूचना प्रोधोगिकी एक्ट 2000 की धारा 67A के अंतर्गत दंडनीय अपराध के लिए उसके खिलाफ दर्ज हुई FIR को रद्द करने की मांग की गई थी। यहां पर हाई कोर्ट ने इस याचिका एवं FIR को रद्द करने से मना कर दिया है।
 
यहां पर उन्होंने दावा किया कि उनका अपने खुद के व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का किसी प्रकार का कोई इरादा नही था इसी के साथ उसने कहा कि उसने अपने स्टेटस को केवल अपने जान पहचान वालो लोगो तक ही सीमित रखा था। यहां पर कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का आपत्तिजनक पोस्ट अपने सोशल मीडिया पर कदापि न करे जिससे किसी की भावना को ठेस पहुँचे। इस सम्बंध में हाई कोर्ट ने इस याचिका को रद्द करके इस केस को रद्द करने से मना कर दिया है।
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