गिरफ़्तारी वारंट कब जारी किया जाता है ? इसका प्रावधान कहा किया गया है ?

आज के हम इस Session के अंदर गिरफ्तारी वारंट के विषय मे चर्चा करेंगे कि आखिर वारंट कब जारी किया जाता है। पहली बात तो ये है कि गिरफ्तारी वारंट का केवल नाम सुनकर ही 99% लोगो मे भय जागृत हो जाता है। इस बात को लेकर उन्हें चिंता भी बनी रहती है कि अब क्या किया जाए आखिर ये क्या होता है तो आज हम इसके बारे में सम्पूर्ण चर्चा करेंगे। गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए दण्ड प्रक्रिया सहिंता 1908 में दी गई है। इसके द्वारा गिरफ्तार वारंट की उतपत्ति हुई है। आपको बता दु की इस सहिंता की धारा 70 से लेकर 80 तक मे गिरफ्तारी वारंट के विषय मे प्रावधान किया गया है।

 
वारंट आखिर किसके द्वारा जारी किया जाता है ?
आपको आम भाषा मे बता दे कि गिरफ्तारी वारंट किसी भी अदालत या फिर ज्यूडिशियल कोर्ट के किसी बहु SDM , कलेक्टर इत्यादि द्वारा जारी किया जाता है। बाकी किसी भी अधिकारी के पास किसी भी प्रकार का वारंट जारी करने का अधिकार नही है।
 

वारंट कब जारी किया जाता है ?
जैसा कि मैंने आपको ऊपर बताया है कि वारंट जारी करने की जो शक्ति होती है वो केवल अदालत को ही होती अन्य किसी को नही होती है , वारंट केवल न्यायालय की जारी कर करता है। कई बार किसी मुकदमे में व्यक्ति हाजिर नही होता है या फिर अदालत किसी व्यक्ति को किसी मुकदमे में हाजिर पाना चाहती है तो वह न्यायालय एक वारंट जारी करता है जिससे उस व्यक्ति को न्यायालय में बुला सके।
 

गिरफ्तारी वारंट किसको दिया जाता है ?
सर्वप्रथम न्यायालय सम्बंधित व्यक्ति जिसको न्यायालय बुलाना चाहता है उसका गिरफ्तारी वारंट बनाकर उस व्यक्ति के सम्बंधित पुलिस थाने में भेज देता है जिससे पुलिस सम्बंधित व्यक्ति को गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश कर सके। यहां पर कानून ने अदालत की इस पावर को लचकदार करते हुए इस शक्ति को और विस्तृत कर दिया इसका धारा 72 में प्रावधान किया गया है जिसके अंतर्गत न्यायालय एक ऐसा वारंट जारी करता है जिसमे सम्बंधित व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए सक्षम होता है।
 
गिरफ्तारी वारंट की समय सीमा कब समाप्त हो जाती है ?
देखिए जब कोर्ट किसी भी व्यक्ति का गिरफ्तारी वारंट जाती करता है तो उसमें दो निर्धारित बिंदु होते है। पहला ये की यदि सम्बंधित व्यक्ति जिसका वारंट जारी किया गया है वह स्वयं कोर्ट में पेश हो जाए दूसरा यह है कि जब पुलिस सम्बंधित व्यक्ति जिसका वारंट जारी किया गया है उसे पुलिस गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश में कर देवे।
 
क्या गिरफ्तारी वारंट में जेल भी जाना होता है ?
इसमे जेल जाने का जो आपका सवाल है यह सम्बंधित मुकदमे के प्रकरण पर निर्भर करता है , जिसके लिए किसी व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष बुलाया गया है। जब उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा तब कोर्ट में उसके बयान लिए जाएंगे इस प्रक्रिया के बाद सम्बंधित नामित व्यक्ति को छोड़ दिया जाता है। दूसरी तरफ यदि किसी गैर जमानती मुकदमे के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति की आरोपी बनाने के लिए जो वारंट जारी किया जाता है उसमें सम्बंधित व्यक्ति जो आरोपी है उसे जेल जाना पड़ सकता है , क्योकि आपको पता है बिना जमानत वाले केस में जमानत मांगने का अधिकार अभियुक्त पर नही होता है ये केवल न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है। इसलिए आपको बता दे कि जेल जाने की प्रक्रिया केवल जारी किए गए वारंट पर ही निर्भर करता है।
 

क्या पुलिस ऐसे में सीधा जेल भेज सकती है ?
आपको यहां पर सरल भाषा मे बता दे कि जब न्यायालय द्वारा वारंट जारी किया जाता है उसमे पुलिस को सीधा जेल भेजने का कोई अधिकार नही होता है। यहां पर पुलिस का काम यही होता है कि वह सम्बंधित व्यक्ति को पकड़ कर 24 घण्टे के अंतराल में सम्बंधित न्यायालय में पेश करना होता है। हालांकि जो पुलिस होती है वह सम्बंधित अपराध करने वाले अपराधी को 24 घण्टे तक ही अपनी अभिरक्षा में रख सकती है। उसके बाद उन्हें न्यायालय में न्यायाधीश के सामने पेश करना होता है।
 
वारंट के द्वारा ऐसे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अदालत द्वारा जारी किया जाता है। आपको बता दे कि वारंट जारी करते समय अदालत बहुत समझदारी एवं सावधानी से कार्य करता है क्योंकि जो वारंट होता है वो व्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म एवं प्रतिबंधित कर देता है। जब अदालत वारंट जारी करती है तो ऐसे में सम्बंधित व्यक्ति को गिरफ्तार करके न्यायलय के समक्ष पेश करना होता है। यहां पर आपको एक बात बता दु की जो वारंट होता है वह बिना अदालत के अपंग हो जाता है। यह शक्ति न्यायालय के न्यायाधीश को प्राप्त सभी शक्तिशाली शक्तियों में से सार्थक शक्ति है।
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